गणित अध्यापक ने बताया अपनी जान का खतरा, स्कूल प्रांगण से अपहरण की कोशिश का लगाया आरोप!

Haryana Sonipat

सत्यखबर सोनीपत (संजीव कौशिक) – स्कूल के छात्रों ने बताया कि कुछ लोग स्कूल में आए थे जिन्हें देखकर गणित अध्यापक प्रवेश स्कूल से भाग गए छात्रों ने बताया कि उनमें से तीन पहलवान थे जिनके हाथ मे रिवाल्वर थी जो सर को मारने आए थे और हम उनको पहचान सकते हैं।

स्कूल अध्यापक कप्तान ने बताया कि जब हम स्कूल में आए जब 3 ,4 के करीब लोग स्कूल के अंदर बैठे हुए थे जब हमने उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि प्रिंसिपल से मिलने आए हैं फिर हमें दूसरे अध्यापक ने बताया कि यह तो प्रवेश का ससुर है फिर हम दूसरी तरफ स्कूल में चले गए तो थोड़ी देर बाद बाहर बहुत जोरदार धमाका हुआ फिर हम बाकी आए तो यहां देखा दो गाड़ियां आपस में टकराई हुई हैं उसमें भी गाड़ियां एक प्रवेश की थी दूसरी उसके ससुर की थी जो भी अपने साथ लेकर आए थे।

प्रवेश ने बताया वह स्कूल में पहुंचा तब वहां प्राचार्या के कार्यालय के सामने उसका दिल्ली निवासी ससुर व उसके साथ 3 पहलवान किस्म के व्यक्ति पहले से बैठे थे। ससुर ने उनकी तरफ ईशारा किया। जिसके कारण उसने को असुरक्षित महसूस किया और अपनी हाजिरी कांपते हुए लगाई। प्राध्यापक का कहना है कि जिस तरह से वे उसे घूर रहे थे तो उसे आभास हुआ कि कहीं वे उस पर हमला न कर दे, इस दौरान उसने अपने फोन से 100 नंबर पर पुलिस को कॉल करनी चाही तो फोन कनेक्ट नहीं हुआ। हाजिरी लगाने के बाद उसने डर के मारे पुलिस थाने जाने का मन बनाते हुए वह स्कूल के गेट के अंदर खड़ी अपनी रिट्ज गाड़ी एचआर 79,4927 की तरफ भागा और गाड़ी स्टार्ट की और चल दिया। तो वे चारों भी उसकी गाड़ी पीछे दौड़े लेकिन मैं तेजी से गाड़ी लेकर निकला ही था कि रस्ते में एक सफेद रंग की सैंट्रो कार उनके चार बंदे सड़क पर तिरछी गाड़ी करके रस्ता रोके खड़े थे।

अब उसे पूरा विश्वास हो गया था कि आरोपी उसका अपहरण करेंगे या उसे जान से मारेंगे। जिसके कारण मजबूरन उसने अपनी गाड़ी मटिंडू स्कूल की तरफ मोड़ी इस दौरान उसके ससुर सहित चारों व्यक्तियों ने अपनी सोची समझी चाल के तहत अपनी सफेद रंग की वैगनआर से उसे रोकने के लिए उसकी गाड़ी को सीधी टक्कर मार दी। गाड़ी से उतरकर वह भागा और मटिंडू स्कूल के विद्यालय के पास एक घर में छिप गया। जहां मकान वालों के घर से 100 नंबर पर फोन करके उसके साथ हुई सारी घटना बताई। उसी फोन से उसने अपने घर अपनी मां को भी सूचित किया और मैं डर के मारे पहले तो काफी देर तक वहीं पर छिपा रहा, इसके बाद देर शाम को जान बचाकर घर पहुंचा। शाम को जब वह पुलिस स्टेशन में जाकर आर्ओ को पूरी घटना बताई तो आईओ ने उसकी शिकायत सुनने के बजाय उसे हवालात में डाल दिया और दोनों तरफ का सामान्य कहासुनी झगड़े का मुकद्दमा बना दिया।

जबकि इस पूरे मामले में मेरा अपहरण करने, रास्ते में गाड़ी रोकने, हमला करने के 8 आरोपी थे। जिन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, केवल दिखावे के लिए दो आरोपियों पर मामूली मामला बनाया गया है। जबकि उन पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए। जिन दो युवकों पर पुलिस ने सामान्य झगड़े का मामला बनाया है, उनमें से एक युवक को झगड़े में था ही नहीं, आरोपी बदला गया है। जो आई. ओ केस कमजोर करने के लिए एक आरेापी भी बदला है। क्योंकि इससे पहले आई.ओ उस पर ये भी दबाव बना रहा था कि तू 60-70 या 80 हजार रुपए ले ले, उनसे माफी भी मंगवा दूंगा, ये केस वापस ले ले। तेरी गाड़ी को भी ठीक करवा देंगे। लेकिन करने पर आईओ ने उससे कहा कि वह तूझे भी हवालात में डालेगा जिससे तेरा पूरा काम बंद जाएगा। शिकायतकर्ता ने पुलिस कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाए हैं।

खरखोदा थाने के सब इंस्पेक्टर ईश्वर ने बताया कि प्रवेश उसकी पत्नी का मनमुटाव चल रहा है प्रवेश का ससुर सम्मन लेकर आया तो उनकी कहासुनी हुई थी हमने दोनों पक्ष बुलाए थे और उनके खिलाफ निवारण कार्रवाई अमल में लाई जा चुकी है।